खबर सक्ती ...
अयोध्या करती है आव्हान, ठाठ से कर मंदिर निर्माण ..

खत्म हुई प्रतीक्षा की पाॅंच सदी ,
रामलला के दर्शन हेतु भक्तगण लालायित ..
सक्ती, रविन्द्र जैन रचित कविता की उक्त पंक्तियों में किया गया यह आव्हान अब 22 जनवरी को राम मंदिर अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ सफलीभूत होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर लाखों राम भक्त अयोध्या पहुंचेंगे। 22 जनवरी को अधिक भीड़ न हो इसलिए सिर्फ आमंत्रितों से ही अयोध्या पहुंचने का आग्रह किया गया है। सक्ती जिले के कारसेवकों का भी वहां जाने के लिए लालायित होना स्वाभाविक है। मिली जानकारी के अनुसार संघ द्वारा 4 फरवरी से कारसेवकों की टोली को बारी-बारी रेल मार्ग से अयोध्या ले जाने की योजना बनायी गयी है। जिससे उनकी चिर प्रतीक्षित अभिलाषा पूरी हो। सन् 1990 की कार सेवा में जाने वाले कारसेवक भाजपा के जिला प्रवक्ता रमेश सिंघानिया से हुई चर्चा के अनुसार वे स्वयं, घनश्याम सिंघानिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक स्वयं सेवक चांपा से 23 अक्टूबर को रात्रि 2 बजे समस्तीपुर रेस्ट हाउस से लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के दूसरे ही दिन अयोध्या रवाना हो गए थे। रमेश सिंघानिया ने बताया कि सतना रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में एकत्रित कारसेवकों को राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख नेत्री उमा भारती ने संबोधित किया। इसके पश्चात सभी कार सेवक चित्रकूट पहुंचे। वहां से दो-तीन दिन बाद राजमाता सिंधिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचने पर गिरफ्तार कर बसों में बिठाकर भिन्न-भिन्न स्थानों पर छोड़ दिया गया। वहां से पद यात्रा प्रारंभ की। पद यात्रा के दौरान शाम को भरतकूप रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां के स्टेशन मास्टर ने रात्रि भोजन की व्यवस्था की। सुबह इंजन में बैठाकर कर्वी स्टेशन भेजा। वहां से पैदल चलकर तुलसीदास के जन्म स्थान राजापुर पहुंचे, वहां अग्रवाल धर्मशाला में सुस्वादु भोजन की व्यवस्था थी। भोजनोपरांत रात्रि विश्राम कर पांच बजे भोर होते ही नाव से जमुना पार कर वे कर्फ्यू के साए में इलाहाबाद तक किसी तरह पहुंच पाए। उससे आगे जाना फिर संभव नहीं हो पाया। इलाहाबाद देवरहा बाबा के आश्रम में वे दो-तीन दिन रुके।उनके साथ देवप्रसाद तिवारी, महेश्वर दुबे, सुगन चंद कर्ष, सुभाष चंद्र तिवारी आदि अनेक कारसेवक थे। उन्होंने यह भी बताया कि बाद में सक्ती-बाराद्वार से पहुंचे बहुत से कार सेवक जिनमें प्रमुख रूप से धनेश्वर राठौर, रामप्रसाद राठौर, होशराम राठौर, जगदीश सर्राफ, नारायण शर्मा, चितरंजय पटेल, लक्ष्मी सोनी, विजय चंद्रा, बाबूलाल सेन, मनमोहन जिंदल, गिरवर जिंदल, सुखीराम राठौर आदि शामिल थे। इनमें से कईयों को प्रयागराज में पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ीं। संघ के तात्कालिक पदाधिकारी बाराद्वार के कृष्ण कुमार तिवारी को इस दौरान जेल में रहना पड़ा।
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