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बडी खबर: कचंदा में घटिया नाली निर्माण पर प्रशासन का शिकंजा ..

मनरेगा की नाली बनी भ्रष्टाचार की नजीर, सचिव निलंबित; तकनीकी सहायक अटैच, सरपंच पर भी कार्रवाई की तैयारी ..
सक्ती, ग्राम पंचायत कचंदा में मनरेगा के तहत कराए गए नाली निर्माण की पोल खुलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले में बड़ी कार्रवाई की है। अप्रैल माह में निर्मित नाली के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब पाए जाने के बाद प्रशासन ने जिम्मेदारों पर शिकंजा कस दिया है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित, तकनीकी सहायक को अटैच करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं सरपंच के विरुद्ध पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए प्रकरण एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वासु जैन को 13 अगस्त को मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीईओ स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण में नाली निर्माण की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की पाए जाने के बाद प्रशासन ने बिना देर किए कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
नाली टूटी तो खुली निर्माण की पूरी पोल –
मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना से हुए निर्माण कार्य के कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होने पर सवाल उठे थे। मौके के निरीक्षण में निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने के बाद प्रथम दृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर कार्रवाई की गई। सचिव पर निर्माण कार्य में घोर लापरवाही और घटिया गुणवत्ता के लिए गाज गिरी, जबकि तकनीकी सहायक द्वारा अपने पदीय दायित्वों के समुचित निर्वहन नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया गया।
सरपंच पर भी कार्रवाई की तलवार –
मामले में प्रशासन ने सिर्फ कर्मचारियों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। ग्राम पंचायत के सरपंच के विरुद्ध भी पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इससे पंचायत स्तर पर निर्माण कार्यों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर प्रशासन के सख्त रुख के संकेत मिल रहे हैं।
सीईओ का दो टूक संदेश—गुणवत्ता से समझौता नहीं –

जिला पंचायत सीईओ वासु जैन ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा सहित सभी विकास एवं निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, लापरवाही या किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कचंदा की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि सरकारी योजना के नाम पर घटिया निर्माण कर जिम्मेदारी से बच निकलना अब आसान नहीं होगा। प्रशासन ने कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
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