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सक्ती विधानसभा चुनाव 2023आज की बात…राजनीतिक विश्लेषण ..

सक्ती, सच! आज राजनीति में जबान कितनी गिर जाती है कि व्यक्ति अपने उपलब्धियां या विजन (दृष्टिकोण) बताने अथवा ये कहें कि अपने गिरेबान में झांकने के बजाय अपने प्रतिद्वंदी के गिरेबां को नापने की तकल्लुफ में लगे नजर आ रहे हैं, यह वाकया आज भारतीय जनता पार्टी के मंच में खुलकर सामने आ रहा था जब कल तक जिस डा महंत का पैर छूते नजर आते रहे थे वही आज उन्हीं डा महंत के लिए भगोड़ा, गुड़ाखुबाज आदि आदि शब्दों का इस्तेमाल कर ठहाके लगा रहे थे ।
इससे घटिया चरित्र और क्या हो सकता है कि कल तक जो डा महंत के लिए गुड़ाखू _लोटा लेके खड़े रहते थे वही उन्हें गुड़ाखुबाज कहे, यह बात गले नहीं उतर रही।
फिर जिनके आंतरिक सांठ गांठ की चर्चा आम है वही अगर मंच से नहीं बिकने की सफाई पेश करे तो दाल में कुछ काला नजर आता है बल्कि अभी भी कार्यकर्ताओं के मिलीभगत के संदेह और आरोप को ही बल मिलता है क्योंकि जनता अगर डा महंत से उसके सक्रियता को लेकर प्रश्न दाग रही है तो आप पर भी सक्ती नगर के साथ दूजा व्यवहार और उपेक्षा करने का आरोप लगा रही है क्योंकि नगर की शान को तार तार करने में अपने 15 साल के शासन में आपकी दल के जनप्रतिनिधियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ा है ।
सक्ती राज परिवार के पतन के बाद हर जनप्रतिनिधि ने कभी जेठा तो कभी नगरदा के नाम पर नगर के साथ छलावा ही किया है, साथ ही सक्ती जिला निर्माण को लेकर 15 साल में आप सबके निष्क्रियता जग जाहिर है।
यह तो छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है कि डा चरणदास महंत का मान बढ़ाते हुए सक्ती जिला का निर्माण किया और जिला निर्माण के साथ क्षेत्र के विकास के नए अध्याय को लिखने की उपलब्धि व सम्मान को कांग्रेस के खाते में डाल दिया।
फिर अगर आपके पास कुछ उपलब्धि है तो जनता के बीच उसकी चर्चा कीजिए ना, बजाय इसके कि सामने वाला को गंदा कहा जाए । ध्यान रहे जब आप दूसरे के ऊपर एक उंगली उठाते है तो बाकी उंगली आपके गंदे कारगुजारियों की और इशारा करती है तब सामने वाले से, आप और बहुत गंदे नजर आते हो क्योंकि आपके पिछले कारगुजारी और अपने ही लोगों के खिलाफ किए गए गंदे हरकत आपको और भी अपने लोगों के बीच घृणा का पात्र बनाता है जबकि इस मामले में डा चरण की छवि आपसे लाख गुना बेहतर है क्योंकि उसने कभी अपने क्या, किसी और पब्लिक के खिलाफ भी थाने में जाकर फंसाने या उलझाने का काम नहीं किया।
जहां तक आर्थिक भ्रष्टाचार की बात है तो आप और आपके परिजनों ने वसूली के मामले में गांव गांव तक को नहीं छोड़ा, जबकि इस मामले में डा महंत के तथाकथित चंद सागिर्दों को छोड़ यह आरोप उनके खिलाफ कभी नहीं रहा है।
फिर पांच साल में अगर आपने डा महंत के साथ गलबंहिया के बजाय उनके खिलाफ कोई आंदोलन छेड़ा होता तो आज उनके खिलाफत को जनता स्वीकारती, पर इतिहास ही अलग है कि आपकी अपनी राजनीति कथा डा महंत सागिर्द में लिखी गई है फिर तो उनके खिलाफ कुछ कहना बेईमानी ही है।
इसलिए अगर आपने सक्ती के भला के लिए अलग कुछ किया हो तो उसकी चर्चा जनता के बीच करें और तब जनता को समझ आए तो आपकी नई कथा बने और आपको सफलता मिल सके, पर जो भाग्य व राजनीतिक समीकरण से मिली सफलता को अपनी रणनीति मान बैठा हो उसे शायद ही सकारात्मक मेहनत की बात समझ आए।
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