खबर सूरजपुर ..
पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी की विरासत सहेजने की पहल, समाधि स्थल और आश्रम के विकास पर जोर ..

कलेक्टर रेना जमील ने गोविंदपुर स्थित समाधि स्थल एवं आश्रम का किया निरीक्षण, अधिकारियों को आवश्यक सुविधाओं के विस्तार और संरक्षण के लिए दिए निर्देश ..
सूरजपुर, आदिवासी समाज में सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण की अलख जगाने वाली पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी की प्रेरणादायी विरासत को सहेजने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत गोविंदपुर (रजमेलान) पहुंचकर माता राजमोहिनी देवी के समाधि स्थल एवं आश्रम का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थल के संरक्षण, रखरखाव और आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए, ताकि इस ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्व के केंद्र का समुचित विकास हो सके।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आश्रम परिसर का भ्रमण कर माता के अनुयायियों से संवाद किया और उनके जीवन, सामाजिक योगदान तथा समाधि स्थल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। उन्होंने परिसर में साफ-सफाई और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी जन सेवा संस्था आश्रम के संरक्षक त्रिभुवन सिंह टेकाम ने शासन द्वारा पूर्व में दिए गए सहयोग की जानकारी देते हुए आश्रम के विकास एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए पहल करने का आग्रह किया। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
माता की स्मृतियों और ऐतिहासिक धरोहर का किया अवलोकन –

कलेक्टर ने माता राजमोहिनी देवी की पुरानी कुटिया का भी भ्रमण किया। इस दौरान माता की पुत्री श्रीमती राम बाई ने पुष्प भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत किया और माता के जीवन से जुड़ी स्मृतियों, उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक बर्तनों तथा अन्य सामग्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टर ने इन ऐतिहासिक स्मृतियों को देखा और माता के जीवन, विचारों तथा समाज सुधार के लिए किए गए कार्यों से जुड़े प्रसंगों को जाना। उन्होंने परिसर स्थित मंदिर में दर्शन किए तथा माता के जीवन पर आधारित पुस्तक, पद्मश्री सम्मान, अन्य सम्मानों और मेडल का भी अवलोकन किया।
सामाजिक बदलाव की प्रेरणास्रोत रहीं माता राजमोहिनी देवी –

माता के अनुयायियों ने बताया कि पद्मश्री माता राजमोहिनी देवी ने आदिवासी समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास, नशाखोरी और शोषण के विरुद्ध व्यापक जनजागरण किया। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं के अधिकारों, आत्मसम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उनके सामाजिक योगदान और समाज सुधार के प्रयासों को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1989 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

अनुयायियों के अनुसार, माता राजमोहिनी देवी के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले माघ मेले में हजारों अनुयायी समाधि स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी पुत्री श्रीमती राम बाई माता के जीवन से जुड़ी स्मृतियों और उनकी सामाजिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी प्रेरणादायी विरासत –
निरीक्षण के दौरान श्रीमती राम बाई, समिति के संरक्षक त्रिभुवन सिंह टेकाम और अन्य अनुयायियों ने आश्रम एवं समाधि स्थल के विकास के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की ओर कलेक्टर का ध्यान आकर्षित किया। इस पर कलेक्टर रेना जमील ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए।

समाधि स्थल एवं आश्रम का समुचित विकास, आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और ऐतिहासिक स्मृतियों का संरक्षण इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, बल्कि माता राजमोहिनी देवी के सामाजिक योगदान, उनके विचारों और समाजसेवा की प्रेरणादायी विरासत को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक समरसता, नशामुक्ति, महिला सशक्तीकरण और समाज सुधार के लिए प्रेरित करती रहेगी।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजेंद्र सिंह पाटले, अनुविभागीय अधिकारी प्रतापपुर रमेश मोर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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