खबर सूरजपुर ..
कलेक्टर रेना जमील के नेतृत्व में सूरजपुर ने रचा जल संरक्षण का नया कीर्तिमानदेश में चौथा, छत्तीसगढ़ में अव्वल ..

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में राष्ट्रीय पहचान, देश के टॉप-10 जिलों में शामिल ,
5.88 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं से 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता का सृजन ..
सूरजपुर, जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में सूरजपुर ने देश में चौथा स्थान हासिल किया है, जबकि छत्तीसगढ़ में जिला प्रथम स्थान पर रहा। इसके साथ ही सूरजपुर को देश के शीर्ष-10 जिलों में स्थान मिला है। यह उपलब्धि जिले में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए गए व्यापक प्रयासों तथा ग्रामीणों की सक्रिय जनभागीदारी का परिणाम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।
कलेक्टर रेना जमील के नेतृत्व में जनभागीदारी को मिला बढ़ावा –

सूरजपुर की इस उपलब्धि में जिला प्रशासन की प्रभावी रणनीति और जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण को स्थानीय जरूरतों से जोड़ते हुए वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कार्यों को प्राथमिकता दी गई। ग्राम पंचायतों, किसानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय को अभियान से जोड़कर बारिश की हर बूंद को सहेजने पर विशेष जोर दिया गया।

कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि जल संरक्षण केवल शासकीय योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सूरजपुर का देश के शीर्ष-10 जिलों में शामिल होना जिलेवासियों की जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण के कार्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए जल संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
5.88 लाख से अधिक संरचनाएं, 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता –

जिले में अब तक 5,88,399 जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। इन संरचनाओं के माध्यम से 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता का सृजन हुआ है। जल संरक्षण के इन प्रयासों से जिले में 5,608.26 हेक्टेयर सिंचित रकबे में वृद्धि हुई है।
फॉर्म पोंड, तालाब गहरीकरण, अमृत सरोवर, रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम जैसी संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल को स्थानीय स्तर पर रोकने और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किसान बने जल संरक्षण अभियान के सक्रिय भागीदार –

सूरजपुर में जल संरक्षण अभियान को केवल प्रशासनिक गतिविधि न बनाकर जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। किसान अपनी भूमि पर जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं, वहीं ग्राम पंचायतें और स्थानीय समुदाय भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरक्षण के कार्यों को गति दी जा रही है।
जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। गांवों में जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ का संदेश धरातल पर –

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को सूरजपुर जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जमीन पर उतारा जा रहा है। जिले की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में जल उपलब्धता और स्थानीय जरूरत के अनुसार जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि बारिश के पानी को अधिकतम मात्रा में गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इन प्रयासों से खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
जिला पंचायत सीईओ ने बताया जनभागीदारी को उपलब्धि का आधार –
जिला पंचायत सीईओ विजेन्द्र सिंह पाटले ने कहा कि ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों, जल सखियों, जल मित्रों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जिले में जल संरक्षण के प्रयासों को लगातार गति मिल रही है।
सूरजपुर की राष्ट्रीय रैंकिंग इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक प्रयासों के साथ ग्रामीणों की भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण का अभियान व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है। देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल कर सूरजपुर ने जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले के लिए नई पहचान कायम की है।
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