खबर सक्ती ...
♦️ 2 घंटे में हेल्पलाइन से सक्रिय हुआ आधार, पर सवाल बरकरार: स्थानीय स्तर पर क्यों नहीं सुलझती आमजन की समस्या? ..

♦️ संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से हुआ चालू, लोगों ने पूछा—जब गांव-तहसील में होना चाहिए समाधान, तो हर बार सुशासन तिहार, जनदर्शन, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक क्यों पहुंच रहे लोग? ..
सक्ती, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के जरिए डभरा विकासखंड के ग्राम खोंधर निवासी संजुक्ता पटेल का निष्क्रिय आधार कार्ड महज दो घंटे में सक्रिय हो गया। जिला प्रशासन ने इसे त्वरित समाधान और सुशासन का उदाहरण बताया है, लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—जब ऐसी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर आसानी से होना चाहिए, तो आम लोगों को हर छोटी-बड़ी परेशानी के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनदर्शन या सुशासन तिहार का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुसार आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निराकरण के लिए संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जिले में जनसेवा का माध्यम बन रही है। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में शिकायतों के निराकरण में तेजी लाई जा रही है। इसी क्रम में खोंधर निवासी श्रीमती संजुक्ता पटेल का आधार कार्ड तकनीकी कारणों से निष्क्रिय हो गया था, जिससे उन्हें शासकीय योजनाओं और आवश्यक सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही थी।
समस्या से परेशान होकर उनके पति नरेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही ई-जिला प्रबंधक दुष्यंत सोनी और आधार टीम ने मामले की जांच की और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर मात्र दो घंटे के भीतर आधार कार्ड पुनः सक्रिय करा दिया। इससे संजुक्ता पटेल की लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर हो गई।
संजुक्ता पटेल ने त्वरित समाधान पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। लेकिन इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में एक चर्चा भी तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि पंचायत, जनपद, तहसील, लोकसेवा केंद्र और संबंधित विभाग स्थानीय स्तर पर समय पर काम करें, तो किसी जरूरतमंद को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक जाने की नौबत ही न आए।
लोगों का यह भी कहना है कि आज हालात ऐसे बन गए हैं कि आधार, राशन, पेंशन, नामांतरण, राजस्व, बिजली-पानी या अन्य बुनियादी समस्याओं के लिए भी आम नागरिक को पहले दफ्तर-दफ्तर भटकना पड़ता है, फिर सुनवाई नहीं होने पर जनदर्शन, सुशासन तिहार या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ता है। सवाल यह है कि जब सरकार ने हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए हैं, तो फिर आम आदमी की शिकायत का समाधान पहली सीढ़ी पर क्यों नहीं हो पा रहा?
यह जरूर है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ने संजुक्ता पटेल को त्वरित राहत दिलाई, लेकिन यह मामला स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता है। असल सुशासन तब माना जाएगा, जब लोगों की समस्याएं गांव, पंचायत, तहसील और ब्लॉक स्तर पर ही समय पर सुलझ जाएं—न कि उन्हें हर बार शिकायत पोर्टल, जनदर्शन या हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाना पड़े।
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