ख़बर रायपुर
रायपुर के काशी स्पाइन हॉस्पिटल में इमरजेंसी सर्जरी से टला पैरालिसिस का खतरा ..

सड़क हादसे के 12 घंटे के भीतर डॉ. विमल अग्रवाल ने की सफल स्पाइन सर्जरी ,
रायपुर के काशी स्पाइन हॉस्पिटल में विश्वस्तरीय स्पाइन उपचार की मिसाल, इमरजेंसी सर्जरी से बदली मरीज की तकदीर ..
रायपुर, एक सड़क हादसे ने खरोरा निवासी दिगेश्वर यादव की जिंदगी पलभर में बदल दी। विगत दिनों सुबह करीब 11 बजे हुए दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। शुरुआत में दर्द सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति बिगड़ गई और उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया। परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल था—क्या अब उनका जीवन हमेशा के लिए व्हीलचेयर तक सीमित हो जाएगा?

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए परिजन उन्हें दोपहर 3 बजे रायपुर स्थित काशी स्पाइन हॉस्पिटल लाया गया। यहां वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. विमल अग्रवाल और उनकी टीम ने तुरंत जांच शुरू की। एमआरआई रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि रीढ़ की हड्डी पर गंभीर दबाव है और नसें प्रभावित हो चुकी हैं। स्पाइन सर्जन डॉ. विमल अग्रवाल ने परिजनों को साफ बताया कि यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया गया तो स्थायी पैरालिसिस का खतरा बढ़ सकता है।
स्पाइन सर्जन डॉ. विमल अग्रवाल की सलाह पर बिना देरी किए शाम 7 बजे इमरजेंसी सर्जरी की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइनल ट्रॉमेटिक पैराप्लेजिया के मामलों में 12 घंटे के भीतर सर्जरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस अवधि के बाद नसों की क्षति स्थायी रूप ले सकती है और रिकवरी की संभावना काफी कम हो जाती है। दिगेश्वर के मामले में समय पर लिया गया निर्णय जीवनदायी साबित हुआ।
ऑपरेशन के बाद की रात परिवार के लिए बेहद कठिन रही। हर पल अनिश्चितता और चिंता से भरा था। लेकिन अगली सुबह उम्मीद की किरण नजर आई। दिगेश्वर ने पैरों में हलचल महसूस की। चिकित्सकीय निगरानी में वे सहारे से खड़े हुए और कुछ कदम चलने में भी सफल रहे। यह क्षण परिवार और चिकित्सकों के लिए भावुक और प्रेरणादायक था।

आप को बता दे कि स्पाइन सर्जन डॉ. विमल अग्रवाल दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल से प्रशिक्षित हैं और अंतरराष्ट्रीय संस्था से फेलोशिप प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में जटिल स्पाइन सर्जरी की विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रायपुर मे काशी स्पाइन हॉस्पिटल इसलिए स्थापित किया कि छत्तीसगढ़ में ही जटिल स्पाइन सर्जरी का विश्वस्तरीय इलाज मिले ताकि मरीजों को इलाज के लिए महानगरों की ओर न भागना पड़े।
हाल ही में इसी अस्पताल में 17 वर्षीय एक किशोरी की 48 डिग्री तक झुकी रीढ़ की सफल सर्जरी कर उसे सामान्य जीवन की ओर लौटाया गया था। ऐसे उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि प्रदेश में अब उच्चस्तरीय स्पाइन उपचार संभव है।

दिगेश्वर यादव की कहानी यह स्पष्ट संदेश देती है कि स्पाइनल चोटों में समय ही सबसे बड़ा निर्णायक कारक है। सही समय पर सही अस्पताल और विशेषज्ञ तक पहुंचने से जिंदगी की दिशा बदली जा सकती है। अंधेरे से उजाले तक की यह यात्रा न केवल एक व्यक्ति की वापसी है, बल्कि समय पर उपचार के महत्व का सशक्त उदाहरण भी है।
अब उम्मीद दूर नहीं—उम्मीद यहीं है।
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