खबर जांजगीर-चांपा ..
तस्मै श्री गुरवे नमः ..

गुरुओं के आशीर्वाद से संवरती है जिंदगी ,
शिक्षक दिवस पर विशेष लेख बलवंत सिंह खन्ना ..
जांजगीर-चांपा, शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं बल्कि उन गुरुओं को स्मरण करने का दिन है जिनकी मेहनत, त्याग और मार्गदर्शन से विद्यार्थी का भविष्य संवरता है। जीवन के संघर्षों और शिक्षा के महत्व को अपने व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ते हुए बलवंत सिंह खन्ना ने इस दिन को और अधिक सार्थक बनाने का प्रयास किया है।
श्री खन्ना ने बताया कि उनका बचपन एक सामान्य ग्रामीण परिवार में बीता। शिक्षा की ओर प्रेरणा उन्हें अपने बाबू जी से मिली, जिन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। बचपन के दिनों की याद साझा करते हुए वे बताते हैं कि कैसे गांव में बरसात के पहले छत की छान्ही सुधारने जैसे कार्य आम थे। ऐसे ही एक दिन उन्होंने साहस जुटाकर बाबू जी से 11वीं कक्षा में दाखिले की अनुमति मांगी। बाबू जी ने छान्ही सुधार के लिए रखे 500 रुपये उन्हें देकर पढ़ाई जारी रखने को कहा। यह प्रसंग उनके जीवन का turning point साबित हुआ।
गांव के सरकारी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने ससहा के शासकीय विद्यालय से 10वीं कक्षा पूरी की। उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा के लिए पामगढ़ के प्रसिद्ध विद्या निकेतन मॉडल कान्वेंट स्कूल में दाखिला लिया। गांव के सरल परिवेश से निकलकर आधुनिक शिक्षण पद्धति वाले इस स्कूल में पढ़ाई शुरू करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन यही चुनौतियां उन्हें आगे बढ़ने का प्रेरणा स्रोत बनीं।

बलवंत सिंह खन्ना ने कहा कि मौलिक शिक्षा की मजबूत नींव उन्हें गांव के स्कूलों से मिली। वहीं विद्या निकेतन स्कूल के संचालक एवं प्राचार्य श्री नरेंद्र पांडेय का मार्गदर्शन उनके जीवन में अमूल्य योगदान रहा। पांडेय सर न केवल श्रेष्ठ शिक्षक थे बल्कि आर्थिक रूप से भी जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करते थे। उनका धैर्य और विद्यार्थियों को प्रेमपूर्वक समझाने की शैली आज भी प्रेरणा देती है।
“पांडेय सर का क्लास में आकर बिना गुस्सा किए हमें समझाना, हर विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का महत्व रेखांकित करता था।” – बलवंत सिंह खन्ना जी कहते हैं।
वे बताते हैं कि विद्यालयीन शिक्षा जीवन की नींव है। महाविद्यालयीन शिक्षा कैरियर को दिशा देती है, लेकिन प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक का शिक्षण विद्यार्थियों के चरित्र और संस्कारों को आकार देता है। यही कारण है कि आज भी उन्हें अपने स्कूल के दिन, शिक्षकों की सीख और डांट फटकार स्नेहिल स्मृतियों की तरह याद आती है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर बलवंत सिंह खन्ना ने कहा, जिन गुरुओं ने मेरी बुनियाद को मजबूत किया, जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया, उन्हें शत्-शत् नमन। यदि आज मैं इस मुकाम तक पहुंचा हूं, तो उसका श्रेय उन्हीं को जाता है।
गुरु का स्थान हमारे समाज में हमेशा सर्वोच्च माना गया है। ऐसे में इस दिन हमें न केवल अपने शिक्षकों को स्मरण करना चाहिए, बल्कि उनकी शिक्षा को जीवन में आत्मसात भी करना चाहिए।
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