खबर अकलतरा ..
वेल विशर फाउंडेशन व नगर के साहित्य पसाधना मंच द्वारा पदम् श्री, पदम् भूषण व पद्म विभूषण तीजन बाई को दी श्रद्धांजलि ..

पंडवानी की अमर स्वर साधिका तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि, अकलतरा में जुटे साहित्यकार और कला प्रेमी ..
तीजन बाई की कला और विरासत को किया नमन, वेल विशर फाउंडेशन व साहित्य साधना मंच ने आयोजित की श्रद्धांजलि सभा ..
अकलतरा, वेल विशर फाउंडेशन एवं अकलतरा साहित्य साधना मंच के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को सरस्वती शिशु मंदिर, अकलतरा परिसर में प्रख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्मश्री, पद्मभूषण तथा पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुआ। शिशु मंदिर के प्राचार्य केशव कौशिक के आह्वान पर अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।


शिक्षाविद् छेदीलाल शर्मा ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी लोककला को देश-विदेश तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। साहित्यकार सतीश दीवान ने कहा कि प्रतिभा कभी महलों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अपने परिश्रम और समर्पण से इतिहास रचती है। राजेश अग्रवाल ने एक तानपुरे के सहारे महाभारत के अनेक पात्रों को जीवंत कर देने की उनकी अद्भुत प्रस्तुति की सराहना की।

गोपेश तुलस्यान ने कापालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत करने की उनकी विशिष्ट कला को अविस्मरणीय बताया। रमेश सोनी ने काव्यात्मक शैली में उनके योगदान को याद किया, जबकि साहित्यकार रविंद्र सिंह बैस ने पुराने मध्यप्रदेश के समय दिल्ली में आयोजित ‘झंकार’ कार्यक्रम की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी थीं।

रमाकांत सिंह ने तीजन बाई के साथ अकलतरा के दिवंगत कलाकारों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। संतोष अग्रवाल ने उनकी गायन शैली को अद्भुत एवं रोमांचकारी बताया। दशरथ नामदेव ने पंडवानी को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल कर इस महान लोककला और उसकी साधिका को स्थायी सम्मान देने की आवश्यकता जताई।

श्रीमती रंजना सिंह ने तीजन बाई के अकलतरा प्रवास की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वेल विशर फाउंडेशन के सदस्य बी.के. ने बताया कि तीजन बाई पहली और अंतिम बार फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में अकलतरा आई थीं, जिसकी यादें आज भी सभी के लिए प्रेरणादायी हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर का समस्त स्टाफ तथा अनिल सिंह, अनिल दुबे, जय कुमार अग्रवाल, अयन जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन वेल विशर फाउंडेशन के सचिव चिराग शर्मा ने किया। उन्होंने तीजन बाई के अकलतरा आगमन से जुड़ी यादों को साझा करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में फाउंडेशन के सदस्य श्रीपाल सिंह बैस ने आभार प्रदर्शन किया।
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