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सरकार बदली, स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी – सक्ती जिले में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था से जनता परेशान ..

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कभी मिसाल बनी स्वास्थ्य व्यवस्था आज निरीक्षण और फोटो तक सिमटी ..

सक्ती, जिला बनने के बाद सक्ती में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की शुरुआत हुई थी, लेकिन हाल की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जब सक्ती को नया जिला घोषित किया गया, तो श्रीमती नूपुर राशि पन्ना को प्रथम कलेक्टर नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. सूरज सिंह राठौर को मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएचएमओ) बनाया गया।

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के नेतृत्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार आया। सुरक्षित प्रसव के लिए समुचित सुविधाएं विकसित की गईं और गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सका। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष की पहल पर जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एम्बुलेंस की सुविधा शुरू की गई, जिससे समय पर इलाज मिलना संभव हो सका। जिले के प्रतिष्ठित परिवारों ने भी सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए भरोसा जताया।

लेकिन सरकार बदलने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति फिर से बिगड़ने लगी है।

जिले के अधिकांश लोग सीएचएमओ को पहचानते तक नहीं। ज़रूरत के समय लोग सीधे बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) से संपर्क करते हैं और शिकायतें भी उन्हीं तक सीमित रह जाती हैं।

वर्तमान सीएचएमओ पर आरोप है कि वे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था से कोई खास सरोकार नहीं रखते। जिले के कई अनुभवी चिकित्सक स्थानांतरण ले चुके हैं। मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हाल ही में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया था, जिसके बाद विपक्ष ने सीएचएमओ को हटाने की मांग की है। वहीं, आरोप है कि सीएचएमओ खुद बीएमओ के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

सत्ताधारी दल के नेता इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। केवल निरीक्षण और फोटो सेशन तक सीमित कार्रवाई से स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और सरकार इस गिरती हुई व्यवस्था की जिम्मेदारी लेगी और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम उठाएगी?

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