खबर सक्ती ...
धान खरीदी में गड़बड़ी को लेकर किसानों का आक्रोश, कलेक्टर के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन ..

भौतिक सत्यापन व गिरदावरी में लापरवाही का आरोप, शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी ..
सक्ती, धान बिक्री में आ रही गंभीर समस्याओं को लेकर मालखरौदा विकासखंड के पीड़ित किसानों ने जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपकर त्वरित समाधान की मांग की है। किसानों का आरोप है कि लापरवाह स्थानीय अमलों द्वारा गिरदावरी एवं भौतिक सत्यापन में भारी त्रुटियां की गई हैं, जिसके कारण उन्हें धान बेचने से वंचित होना पड़ रहा है।
गबेल समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता लालू गबेल के नेतृत्व में किसानों ने 29 दिसंबर 2025 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मालखरौदा के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान एसडीओ राजस्व ने ज्ञापन प्राप्त कर शीघ्र कार्रवाई कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
किसानों ने बताया कि कई मामलों में किसी किसान की पूरी कृषि भूमि, जैसे 5 एकड़ रकबा, को ही अन्य फसल के नाम पर भौतिक सत्यापन कर दिया गया है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। वहीं अनेक छोटे किसानों का धान रकबा अधूरा दर्ज होने के कारण धान खरीदी पोर्टल में सही प्रविष्टि नहीं हो पाई है। इसके चलते किसानों को टोकन मिलने और धान बिक्री में भारी परेशानी हो रही है।

ज्ञापन में किसानों ने स्थानीय प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि किसान लंबे समय से लिखित आवेदन देकर अपनी समस्या बता रहे हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उल्टे किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और उनकी गंभीर समस्याओं को फर्जी करार दिया जाता है। कई बार किसानों को “अपनी समस्या सरकार के पास ले जाओ” कहकर टाल दिया जाता है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बड़े किसानों की धान खरीदी लिमिट कम होने के कारण तीन बार टोकन मिलने के बाद भी पूरा धान नहीं बिक पा रहा है। साथ ही कुछ धान खरीदी केंद्रों में निर्धारित मापदंड से अधिक मनमानी तौल की जा रही है, जो किसानों के साथ सरासर अन्याय है।
किसानों का कहना है कि गिरदावरी और भौतिक सत्यापन में हुई लापरवाही से शासन की छवि धूमिल हो रही है, जो छत्तीसगढ़ सरकार के लिए गंभीर चिंतन का विषय है। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस दौरान पीड़ित किसानों में मुख्य रूप से भरत राकेश गबेल मुक्ता, राधेश्याम चंद्रा मोहतरा, कुश कुमार वर्मा सारसकेला, लव कुमार गबेल सारसकेला, उमाशंकर चंद्रा पिहरीद, अरुण प्रकाश वर्मा सारसकेला, जीवन गबेल सुलौनी, प्रकाश गबेल जोरवा, ललित चंद्रा मालखरौदा, दादू चंद्रा सिंघरा, गेंद लाल गवेल जोरवा, संतोष ननकी दाऊ गबेल मुक्ता, धनंजय वर्मा सारसकेला, तुलेश्वर साहू सिंघरा, रेशम लाल चंद्र सिंघरा, पुरुषोत्तम चंद्रा सिंघरा, नारायण चंद्रा सिंघरा, लक्ष्मी प्रसाद चंद्रा चिखली, उमेन्द सिंह सिदार भुतहा, विजय कुमार जोरवा, अजीत पटेल मुक्ता, मिथलेश चंद्रा पिहरीद, तरुण गबेल परसी व अन्य किसान शामिल है। इस अवसर किसानों को कमलेश गबेल ढीमानी, अधिवक्ता मनोज गबेल, मीडिया प्रभारी हरि गवेल पोता द्वारा विशेष सहयोग प्रदान किया गया।
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