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PV ऐप की खामियों पर पटवारी संघ का विरोध, 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल ..

बिना नक्शा बटांकन के खेतों की डिजिटल मैपिंग पर सवाल, गलत सर्वे से धान खरीदी में किसानों को नुकसान की आशंका ..
सक्ती, फसल भौतिक सत्यापन (PV) ऐप की प्रक्रिया को अव्यावहारिक बताते हुए राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़, जिला शाखा सक्ती ने 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। संघ ने PV ऐप में कार्य का बहिष्कार करते हुए ऐप आधारित कार्यप्रणाली की समीक्षा, दमनात्मक निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई वापस लेने, वेतन विसंगति दूर करने और राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि बिना पर्याप्त तकनीकी आधार और नक्शा बटांकन के खेतों की डिजिटल मैपिंग कराने से राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी हो सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की धान खरीदी पर पड़ने की आशंका है।
बिना नक्शे के खेतों की सही पहचान बड़ी चुनौती –
राजस्व पटवारी संघ के अनुसार, पारंपरिक गिरदावरी व्यवस्था में पटवारी खेतों में पहुंचकर फसल का निरीक्षण करते थे और संबंधित खसरे में फसल की जानकारी दर्ज करते थे। इसके बाद डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) लागू किया गया। प्रारंभिक चरण में उन्हीं खसरों को इसमें शामिल किया गया, जिनका नक्शा बटांकन डिजिटल सर्वर पर उपलब्ध था। बाद में कुछ अन्य खसरे भी जोड़े गए, लेकिन बड़ी संख्या में खसरे सर्वे से बाहर रह गए। कई स्थानों पर एक ही डिजिटल मैपिंग में अनेक खसरों को शामिल किए जाने की समस्या भी सामने आई।

संघ का कहना है कि शेष खसरों को सर्वेक्षण में शामिल करने के लिए PV ऐप लाया गया है। इसमें ऐसे खसरे भी शामिल हैं, जिनका नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है। प्रक्रिया के तहत पटवारी को खेत के चारों कोनों पर पहुंचकर फोटो लेनी होती है। इन तस्वीरों के आधार पर खेत का डिजिटल पॉलीगॉन तैयार कर DCS सर्वर पर भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित खसरे की फसल का सर्वेक्षण कराया जाता है।
खेतों तक पहुंचना मुश्किल, मैदानी परिस्थितियों की अनदेखी का आरोप –
संघ ने सवाल उठाया है कि खरीफ की फसल खड़ी होने के दौरान खेतों के चारों कोनों तक पहुंचकर तस्वीरें लेना कई स्थानों पर बेहद कठिन है। जलभराव, खराब मेड़, पहुंच मार्ग का अभाव और तार की घेराबंदी जैसी परिस्थितियां सर्वेक्षण में बाधा बन रही हैं। वहीं, जिन खसरों का नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है, उनकी वास्तविक सीमा और सही पहचान सुनिश्चित करना भी चुनौतीपूर्ण है।
संघ के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में सभी क्षेत्रों में एक जैसी प्रक्रिया लागू करना व्यावहारिक नहीं है। स्थानीय राजस्व अभिलेखों और खेतों की सीमाओं की जानकारी के बिना सर्वेक्षण कराने से गलतियां होने की आशंका बढ़ सकती है।
प्राइवेट सर्वेयरों के सर्वे पर भी उठाए सवाल –
पटवारी संघ ने कहा कि मैदानी कठिनाइयों को लेकर विरोध दर्ज कराए जाने के बाद PV ऐप का कार्य प्राइवेट सर्वेयरों के माध्यम से कराया जा रहा है। संघ ने सवाल उठाया कि संबंधित गांव के राजस्व अभिलेखों, खसरा नंबरों और खेतों की वास्तविक सीमाओं की जानकारी के बिना बाहरी सर्वेयर सही खसरे की पहचान कैसे करेंगे?
संघ के अनुसार, यदि गलत पहचान के आधार पर पॉलीगॉन तैयार किया गया, तो एक किसान का खेत दूसरे किसान के खसरे में प्रदर्शित हो सकता है। इससे खेत की सीमा, रकबे और फसल संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड में विसंगतियां उत्पन्न होने की आशंका है। संघ ने सर्वेक्षण की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन अनिवार्य करने की मांग की है।
धान खरीदी में किसान फंसे तो जिम्मेदार कौन? –
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर संघ की सबसे बड़ी चिंता धान खरीदी से जुड़ी है। संघ का कहना है कि यदि DCS सर्वेक्षण में दर्ज जानकारी के आधार पर धान खरीदी की जाती है, तो गलत खसरा पहचान या फसल की गलत प्रविष्टि किसान के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। वास्तविक रूप से धान की फसल उगाने के बावजूद किसी किसान का रिकॉर्ड गलत दर्ज हो गया, तो उसे अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो सकती है।
संघ ने सवाल किया है कि तकनीकी सर्वेक्षण में गलती के कारण यदि कोई किसान धान बेचने से वंचित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी स्थिति में किसान को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था है? बिना नक्शा बटांकन के तैयार किए गए पॉलीगॉन की प्रमाणिकता कौन सुनिश्चित करेगा?
तकनीकी सुधार के साथ वैकल्पिक व्यवस्था की मांग –
राजस्व पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि वह डिजिटल गिरदावरी या आधुनिक तकनीक का विरोधी नहीं है, बल्कि तकनीकी कमियों और मैदानी परिस्थितियों की अनदेखी कर दबावपूर्वक काम कराने का विरोध कर रहा है। संघ ने PV ऐप की प्रक्रिया की तकनीकी एवं व्यावहारिक समीक्षा कराने की मांग की है।
संघ की प्रमुख मांगों में बिना नक्शा बटांकन वाले खसरों के लिए पहले उचित नक्शा एवं मैपिंग की व्यवस्था करना, Geo Referencing Sheet और Map Overlap Sheet उपलब्ध कराना, खेत के चारों कोनों की फोटो लेने की अनिवार्यता के स्थान पर Google Map अथवा अन्य उपयुक्त डिजिटल माध्यम से वास्तविक सीमाओं के अनुसार पॉलीगॉन तैयार करने की सुविधा देना तथा विपरीत परिस्थितियों में सर्वेक्षण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना शामिल है। इसके अलावा, प्राइवेट सर्वेयरों द्वारा किए गए सर्वेक्षण का स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन –
PV ऐप के विरोध के साथ पटवारी संघ ने चार प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें PV ऐप में कार्य का बहिष्कार और अनावश्यक ऐप आधारित कार्यप्रणाली बंद करना, दमनकारी निलंबन एवं स्थानांतरण की कार्रवाई बिना शर्त वापस लेना, वेतन विसंगति दूर करना तथा राजस्व निरीक्षक पद पर विभागीय पदोन्नति करना शामिल है।
संघ का कहना है कि तकनीकी और व्यावहारिक कमियों को दूर किए बिना सर्वेक्षण का कार्य दबावपूर्वक कराना उचित नहीं है। डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना और राजस्व अभिलेखों को अधिक सटीक बनाना होना चाहिए, न कि गलत प्रविष्टियों के कारण किसानों को अपनी ही उपज बेचने में परेशानी उठानी पड़े। संघ ने इस आंदोलन को पटवारियों के अधिकारों के साथ किसानों के खेतों की सही पहचान, राजस्व अभिलेखों की शुद्धता और उनकी उपज के उचित अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
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