खबर सक्ती ...
अरनब चक्रवात से फसल क्षति का सर्वेक्षण तेज, खेतों में पहुंचकर उप संचालक कृषि तरुण प्रधान ने लिया जायजा ..

मालखरौदा और डभरा के प्रभावित गांवों में किया निरीक्षण, किसानों को जल निकासी और फसल बीमा की सूचना देने दी समझाइश ,
बीमित किसान 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर दें सूचना, नियमानुसार मिलेगा बीमा का लाभ ..
सक्ती, अरनब चक्रवात के प्रभाव से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान के बाद कृषि विभाग ने क्षति का आकलन शुरू कर दिया है। कलेक्टर के निर्देश पर प्रभावित गांवों में मैदानी अमले के माध्यम से सर्वेक्षण कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक फसल क्षति का आकलन कर पात्र किसानों को शासन के नियमानुसार मुआवजा एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ दिलाया जा सके।

इसी कड़ी में 31 अक्टूबर को उप संचालक कृषि सक्ती तरुण कुमार प्रधान स्वयं प्रभावित गांवों में पहुंचे और किसानों के खेतों का निरीक्षण कर फसल क्षति की स्थिति का जायजा लिया। कृषि उत्पादन आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन एवं कलेक्टर सक्ती के निर्देशानुसार उन्होंने विकासखंड मालखरौदा के ग्राम बंदोरा, पोता एवं करिगांव में फसलों को हुए नुकसान का सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से चर्चा कर खेतों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए अतिशीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी। साथ ही बीमित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर फसल क्षति की वास्तविक सूचना दर्ज कराने की जानकारी दी।
इसी प्रकार विकासखंड डभरा के ग्राम पुटीडीह, भेड़ीकोना एवं गोबरा में भी फसल क्षति का सर्वेक्षण किया गया। उप संचालक कृषि श्री प्रधान ने विभागीय मैदानी अमले को प्रभावित किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने तथा फसल क्षति का वास्तविक आकलन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
72 घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी –

कृषि विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे स्थानीय आपदा अथवा प्रतिकूल मौसम के कारण फसल क्षति होने पर भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर सूचना दे सकते हैं। सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि एवं कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर क्षति का सर्वेक्षण करेंगे।
यदि फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई अथवा बंडलों में सुरक्षित रखी गई फसल बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त होती है, तो उसका आकलन कर नियमानुसार 15 दिनों के भीतर दावा भुगतान का प्रावधान है। वहीं खड़ी फसलों की क्षति का आकलन फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त औसत उपज के आधार पर किया जाएगा।

निरीक्षण एवं सर्वेक्षण के दौरान बंदोरा और करिगांव के सरपंच, बजाज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रतिनिधि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मालखरौदा, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। डभरा विकासखंड के गांवों में भी संबंधित जनप्रतिनिधियों, बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में सर्वेक्षण किया गया।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल क्षति की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना दें, ताकि सर्वेक्षण एवं बीमा दावा प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके और प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत मिल सके।
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