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वेदांता पावर प्लांट में मौत का ब्लास्ट: 17 मजदूरों की जान गई, प्रशासन–कंपनी की लापरवाही पर उठे सवाल ..

मुआवजे की घोषणाओं के बीच जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज, आखिर कब रुकेगा मजदूरों की मौत का सिलसिला? ..
सक्ती हादसा बना सिस्टम पर सवाल: जांच के आदेश, लेकिन जिम्मेदार कौन? ..
सक्ती, सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस भीषण हादसे में अब तक 17 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि दो दर्जन से अधिक श्रमिक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। घटना के बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन भले ही सक्रियता का दावा कर रहे हों, लेकिन इतने बड़े हादसे ने उनकी तैयारियों और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे, घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया और मुआवजे की घोषणाएं भी कर दी गईं। लेकिन सवाल यह है कि जब प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन ठीक से होता, तो क्या इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ती?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वेदांता पावर प्लांट में लंबे समय से सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही थी। बॉयलर जैसे संवेदनशील उपकरणों की नियमित जांच और मेंटेनेंस को नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जरूर दे दिए हैं, लेकिन अक्सर ऐसे मामलों में जांच रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह जाती है और जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस बार भी यही डर सताने लगा है कि कहीं यह हादसा भी सिर्फ मुआवजे और औपचारिक जांच तक सीमित न रह जाए।

कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और घायलों को 15 लाख रुपये देने की घोषणा की है, वहीं सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है। लेकिन क्या कुछ लाख रुपये मजदूरों की जान की कीमत हो सकते हैं? यह सवाल हर किसी के मन में है।




सबसे चिंताजनक बात यह है कि मरने वाले मजदूर अलग-अलग राज्यों—छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश—से आए थे, जो रोजी-रोटी के लिए यहां काम कर रहे थे। उनके परिवारों पर अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
अब जरूरत सिर्फ राहत और मुआवजे की नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई की है। दोषियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वरना हर बार की तरह इस बार भी मजदूर ही सिस्टम की लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे।
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