खबर सूरजपुर ..
कलेक्टर रेना जमील ने बढ़ाया त्रिभुवन का हौसला, श्रवण यंत्र से मिली सपनों को नई उड़ान ..

सुनने की चुनौती को मात देकर NEET में रचा सफलता का इतिहास, किसान परिवार का बेटा बनेगा पहला डॉक्टर ,
रोज 9-10 घंटे स्व-अध्ययन कर हासिल की मंजिल, मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में लिया प्रवेश ..
सूरजपुर, सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के ऐसे युवाओं की प्रेरक उपलब्धियों को सामने लाया जा रहा है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के दम पर सफलता हासिल की है। इसी कड़ी में प्रेमनगर के किसान परिवार के होनहार बेटे त्रिभुवन प्रताप सिंह की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है। कक्षा नौवीं से श्रवण संबंधी समस्या का सामना कर रहे त्रिभुवन ने अपनी इस चुनौती को कभी अपने सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर में प्रवेश हासिल किया है। चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद त्रिभुवन अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनेंगे।
कलेक्टर रेना जमील ने बढ़ाया हौसला, श्रवण यंत्र किया प्रदान –कलेक्टर रेना जमील ने बढ़ाया हौसला, श्रवण यंत्र किया प्रदान –

त्रिभुवन की इस उपलब्धि पर कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कलेक्टर ने त्रिभुवन के संघर्ष और सफलता की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति उनका समर्पण जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।
कलेक्टर की पहल पर समाज कल्याण विभाग के माध्यम से त्रिभुवन को श्रवण यंत्र भी प्रदान किया गया, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी सुविधा मिल सकेगी। श्रवण यंत्र मिलने से त्रिभुवन के चेहरे पर खुशी दिखाई दी और उनके आत्मविश्वास को भी नई मजबूती मिली।
हिंदी माध्यम से पढ़ाई, रोज 9 से 10 घंटे किया स्व-अध्ययन –
त्रिभुवन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रेमनगर में पूरी की। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले त्रिभुवन ने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे। NEET की तैयारी के दौरान उन्होंने NCERT की पुस्तकों को अपना मुख्य आधार बनाया और प्रतिदिन करीब 9 से 10 घंटे स्व-अध्ययन किया। कठिन विषयों का बार-बार अभ्यास, नियमित पढ़ाई और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता ने उन्हें सफलता की राह दिखाई।
किसान पिता की मेहनत को बनाया अपनी ताकत –
त्रिभुवन के पिता अजीत राम किसान हैं और खेती-बाड़ी के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों वाले किसान परिवार में पले-बढ़े त्रिभुवन ने आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के सामने हार मानने के बजाय इन्हें अपनी मेहनत की ताकत बनाया। अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के साथ उनका डॉक्टर बनने का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
त्रिभुवन का कहना है कि सुनने में परेशानी के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। NCERT की पुस्तकों से नियमित स्व-अध्ययन और लगातार अभ्यास को उन्होंने अपनी सफलता का आधार बताया। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियां मनुष्य की परीक्षा जरूर लेती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प के सामने कोई चुनौती स्थायी बाधा नहीं बन सकती।
त्रिभुवन की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए भी संदेश है, जो संसाधनों की कमी या किसी शारीरिक चुनौती के कारण अपने सपनों को छोटा समझने लगते हैं। उनका संघर्ष और उपलब्धि यह साबित करती है कि सही लक्ष्य, निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से कठिन से कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।
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