खबर सक्ती ...
छह माह तक नियमित दवा और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से टीबी से हुए स्वस्थ ..

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से मिला निःशुल्क उपचार और पोषण सहायता का लाभ ..
सक्ती, समय पर बीमारी की पहचान, नियमित उपचार और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से टीबी जैसी गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है। इसकी मिसाल विकासखंड डभरा के ग्राम पुरेना बुद्धा निवासी 26 वर्षीय सतीश जांगड़े हैं, जिन्होंने नियमित उपचार के जरिए टीबी को हराकर स्वस्थ जीवन की ओर वापसी की है। उनकी यह कहानी राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता के महत्व को रेखांकित करती है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई सतीश जांगड़े की सफलता की कहानी बताती है कि समय पर जांच और निर्धारित अवधि तक दवाइयों का नियमित सेवन टीबी से मुक्ति पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सतीश को सीने में दर्द और बुखार की शिकायत होने पर उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा में जांच कराई। जांच में टीबी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके उपचार की प्रक्रिया शुरू की। वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक और मितानिन के सहयोग से उन्होंने लगातार छह माह तक नियमित रूप से दवाइयों का सेवन किया। चिकित्सकीय मार्गदर्शन और उपचार के प्रति निरंतरता के परिणामस्वरूप उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ और आज वे स्वस्थ होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
निःशुल्क दवाइयों के साथ मिली पोषण सहायता –

सतीश जांगड़े ने बताया कि टीबी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से उनका उपचार शुरू हुआ। उपचार के दौरान उन्हें निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिमाह 500 रुपये की पोषण सहायता राशि भी मिली, जिससे उपचार के दौरान उन्हें काफी सहयोग प्राप्त हुआ। सतीश ने समय पर जांच, नियमित उपचार और स्वास्थ्य विभाग से मिले सहयोग के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
टीबी उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयास –
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार और मरीजों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में मदद करना है।
स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ आमजन में जागरूकता भी टीबी उन्मूलन के लिए जरूरी है। सीने में दर्द, लंबे समय तक खांसी, बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराना चाहिए। टीबी की पुष्टि होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाइयों का पूरा कोर्स लेना आवश्यक है। सतीश जांगड़े की कहानी इस बात का संदेश देती है कि समय पर जांच और नियमित उपचार से टीबी को मात देकर सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
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