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सक्ती में प्रधान आरक्षक निलंबित: अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को संरक्षण देने का आरोप, पहले भी हो चुका है सस्पेंड ..

सक्ती, जिले में मालखरौदा थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक अश्वनी जायसवाल (बैच नंबर 40) को पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकिता शर्मा ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रधान आरक्षक पर आरोप है कि वे अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों को संरक्षण दे रहे थे और अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे।

एसपी कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, अश्वनी जायसवाल के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वे अवैध कार्यों में लिप्त लोगों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। शिकायतों के आधार पर प्रथम दृष्टया उनके आचरण को संदिग्ध माना गया है। इस मामले में प्रारंभिक जांच के लिए एसपी ने सक्ती एसडीओपी मनीष कुंवर को जांच के आदेश दिए हैं, जिसके तहत सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। निलंबन की अवधि में अश्वनी जायसवाल को जीवन निर्वाह भत्ते का प्रावधान नियमानुसार होगा।
पहले भी हो चुका है निलंबन –
यह पहली बार नहीं है जब प्रधान आरक्षक अश्वनी जायसवाल को निलंबित किया गया है। मार्च 2020 में बिर्रा थाना में पदस्थ रहते हुए उन पर गांजा तस्करों से रिश्वत लेने और उन्हें छोड़ने का आरोप लगा था। यह मामला उस समय गंभीर हो गया जब स्थानीय समाचार पत्रों में इस संबंध में खबरें प्रकाशित हुईं। इसके बाद एसपी ने मामले की जांच कराई और आरोप सही पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
मारपीट के आरोप भी लगे थे –

अश्वनी जायसवाल पर पूर्व में भी एक और गंभीर आरोप लग चुका है। मालखरौदा थाना क्षेत्र के पोता गांव के निवासी महेंद्र कुमार सारथी ने प्रधान आरक्षक पर उनके भाई चांद कुमार सारथी के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया था। इस मामले में भी थाना प्रभारी को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
कड़ी कार्रवाई की उम्मीद –
अश्वनी जायसवाल के खिलाफ उठाए गए इस कड़े कदम को विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। एसपी अंकिता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी –
मामले की जांच जारी है और आगामी दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो प्रधान आरक्षक के खिलाफ और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
इस घटना ने पुलिस विभाग में हो रही अनुशासनहीनता को उजागर कर दिया है, जिससे उच्च अधिकारियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है। जनता को उम्मीद है कि इस तरह के मामलों में न्याय सुनिश्चित होगा।
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