खबर सक्ती ...
रबी 2025-26 : सक्ती में दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण संपन्न ..

जैविक उपायों व सुरक्षित कीटनाशक उपयोग पर किसानों को मिला विशेष मार्गदर्शन ..
सक्ती, रबी 2025-26 के अंतर्गत दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन उप संचालक कृषि कार्यालय, जिला सक्ती में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआईपीएमसी), रायपुर तथा कृषि विभाग सक्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रगतिशील किसान, महिला किसान, पेस्टीसाइड डीलर, किसान मित्र एवं कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन तरुण कुमार प्रधान, उप परियोजना संचालक कृषि तथा नीरज कुमार सिंह, उप निदेशक (ई), केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान नीरज कुमार सिंह ने केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र की भूमिका, उपयोगिता एवं धान तथा सब्जी फसलों में आईपीएम (समेकित नाशीजीव प्रबंधन) तकनीकों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. आशीष जायसवाल ने खेती में सांस्कृतिक, यांत्रिक एवं जैविक उपायों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल आवश्यकता अनुसार, अनुशंसित मात्रा में एवं पूर्ण सुरक्षा के साथ करने की सलाह दी।
डॉ. जायसवाल ने बीजोपचार के महत्व को सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि इससे बीज जनित रोगों की रोकथाम, बेहतर अंकुरण, मजबूत पौध विकास एवं अधिक उत्पादन संभव होता है। उन्होंने रासायनिक एवं जैविक दोनों प्रकार के बीजोपचार को लाभकारी बताते हुए जैव उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

इसी क्रम में कन्हैया लाल मीना ने एन.पी.एस.एस. मोबाइल एप की जानकारी देते हुए कीटनाशकों के सुरक्षित एवं संतुलित उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कीटनाशकों का अत्यधिक या गलत प्रयोग फसल, मिट्टी एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने, रसायनों पर निर्भरता कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे तथा प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर डॉ. आशीष जायसवाल, वरुणेश कुमार (सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी), कन्हैया लाल मीना (वैज्ञानिक सहायक), जी.पी. हरिपाल (सहायक संचालक कृषि), कृषि विकास अधिकारी सक्ती, मालखरौदा, डभरा एवं जैजैपुर, कृतराज (अनुविभागीय अधिकारी कृषि सक्ती), सुमन सिंह पैकरा (सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी सक्ती) सहित विभागीय मैदानी अमले की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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