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40 किलो धूपबत्ती से कलाकार अमित तम्बोली ने साकार किया मौलीश्वर गणेश का अनोखा पंडाल ..

150 घंटे से अधिक की मेहनत से तैयार कलाकृति, 14 हजार धूपबत्तियों से बनाया आकर्षक पंडाल; अनूठे विसर्जन से देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश ..
सक्ती, गणेशोत्सव के दौरान सक्ती में आस्था के साथ कला और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। अपनी रचनात्मक कला के लिए अलग पहचान रखने वाले सक्ती के कलाकार अमित तम्बोली ने इस बार करीब 40 किलो धूपबत्ती यानी लगभग 14 हजार धूपबत्तियों से भगवान मौलीश्वर गणेश का आकर्षक पंडाल तैयार किया है। इस अनूठी कलाकृति को तैयार करने में उन्हें 150 घंटे से अधिक समय लगा है।

कलाकार अमित तम्बोली पिछले करीब 12 वर्षों से गणेशोत्सव के अवसर पर अपनी कला के माध्यम से अलग-अलग तरह की कलाकृतियां और पंडाल तैयार करते आ रहे हैं। वर्ष 2025 में भी उन्होंने महज 36 इंच लंबाई, 24 इंच चौड़ाई और लगभग 36 इंच ऊंचाई वाले छोटे पंडाल का निर्माण कर उसमें भगवान गणेश की स्थापना की थी। इस बार उन्होंने अपनी रचनात्मकता को एक कदम आगे बढ़ाते हुए धूपबत्तियों का उपयोग कर मौलीश्वर गणेश का अनोखा पंडाल तैयार किया है।
14 हजार धूपबत्तियों से तैयार हुआ पंडाल –

अमित तम्बोली द्वारा निर्मित इस पंडाल की लंबाई लगभग 36 इंच, ऊंचाई 42 इंच और चौड़ाई 24 इंच है। इसके निर्माण में करीब 40 किलो धूपबत्ती का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल की संरचना तैयार करने के लिए कार्डबोर्ड, पुट्ठा, ग्लू, ग्लू गन सहित अन्य सामग्री का उपयोग किया गया। इसके बाद धूपबत्तियों को कलात्मक ढंग से सजाकर पंडाल को आकर्षक स्वरूप दिया गया।

इस रचनात्मक कार्य में अमित तम्बोली को उनके परिवार का भी भरपूर सहयोग मिला। अंशु और आशी तम्बोली सहित पूरे परिवार ने निर्माण कार्य में सहयोग करते हुए इस कलाकृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं करीब 40 किलो धूपबत्ती उपलब्ध कराने में योगेश डालमिया, सक्ती का सहयोग प्राप्त हुआ।
पूजा-अर्चना के साथ विशेष प्रसाद बना आकर्षण –
पंडाल में विराजमान भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना पंडित हरनारायण के मंत्रोच्चार के साथ कराई गई, जिसमें मुख्य यजमान अंशु तम्बोली रहे। प्रतिदिन पूजा और आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। खास बात यह है कि श्रद्धालुओं को धूपबत्ती से मिलते-जुलते आकार का विशेष मीठा प्रसाद भी दिया जा रहा है, जो बच्चों और बड़ों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा गणेश विसर्जन –
इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन दोपहर 1 बजे हवन-पूजन के बाद गणेश विसर्जन का अनूठा और पर्यावरण हितैषी प्रयास किया जाएगा। इसके लिए पंडाल के बाहर एक बड़े पात्र में भगवान गणेश की प्रतिमा रखकर मंत्रोच्चार की रिकॉर्डिंग के साथ दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और गंगाजल युक्त जल से अभिषेक किया जाएगा।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भी इस अवसर पर अपने घर से जल एवं पूजा सामग्री लाकर अभिषेक में सहभागी बनने का आग्रह किया है। अभिषेक के बाद बचने वाले अवशेष और मिट्टी युक्त जल को गमले में डालकर उसका उपयोग पौधों के लिए किया जाएगा।

कलाकार अमित तम्बोली की यह पहल कला और आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। धूपबत्तियों से तैयार मौलीश्वर गणेश का यह अनोखा पंडाल जहां उनकी 12 वर्षों की कलात्मक साधना और रचनात्मक सोच को दर्शाता है, वहीं पर्यावरण हितैषी विसर्जन के माध्यम से नदी-तालाबों को स्वच्छ रखने और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचाने का प्रयास है।
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