खबर सक्ती ...
सुशासन तिहार के बीच जनदर्शन में उमड़ी फरियादें, आखिर शिविरों में क्यों नहीं सुलझ रहीं समस्याएं? ..

20 आवेदन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, “सुशासन” के दावों पर उठे सवाल ..
सक्ती, जिले में एक ओर शासन द्वारा “सुशासन तिहार 2026” के तहत गांव-गांव जनसमस्या निवारण शिविर लगाकर त्वरित समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दूरदराज के ग्रामीण अपनी समस्याओं की फाइलें लेकर कलेक्ट्रेट के जनदर्शन में भटकने को मजबूर हैं। मंगलवार को आयोजित जनदर्शन में कुल 20 आवेदन प्राप्त हुए, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया।

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुशासन तिहार के दौरान आयोजित समाधान शिविरों में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित आवेदनों पर नाराजगी जताते हुए प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश भी दिए।

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब 1 मई से 10 जून तक पूरे जिले में समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, तब भी ग्रामीणों को अपनी समस्याएं लेकर जनदर्शन तक क्यों पहुंचना पड़ रहा है? क्या शिविरों में सिर्फ खानापूर्ति हो रही है, या फिर जमीनी स्तर पर शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा?

जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों ने दिव्यांग सहायता, क्षतिग्रस्त मकान के लिए राहत राशि, मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता, सीमांकन, बोर खनन, मनरेगा में नाम जोड़ने और जमीन बटांकन जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर आवेदन सौंपे। कई आवेदक ऐसे थे जो दूरस्थ गांवों से घंटों सफर तय कर जिला मुख्यालय पहुंचे।

ग्राम रीवापाली निवासी श्याम कुमार उरांव ने दिव्यांग अनुदान की मांग रखी, वहीं किरारी निवासी सुरेंद्र दास महंत ने आंधी-बारिश में क्षतिग्रस्त मकान के लिए सहायता राशि की गुहार लगाई। अमेराडीह निवासी घनश्याम कुर्रे ने गंभीर बीमारी के इलाज हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद मांगी। चुरतेला निवासी सुकलाल सिदार सीमांकन के लिए भटकते नजर आए, जबकि जर्वे और रानीगांव के ग्रामीण पानी और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवेदन करते दिखाई दिए।

जनदर्शन में जिला पंचायत सीईओ वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र लकड़ा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदन तत्काल सौंपते हुए शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि प्रत्येक मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जिला स्तरीय जनदर्शन आयोजित किया जाता है, लेकिन “सुशासन तिहार” के बीच भी लोगों का जिला मुख्यालय पहुंचना प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।
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