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जांजगीर-चांपा और सक्ती में कथित फर्जी शिक्षा केंद्रों का जाल, छात्रवृत्ति व कंप्यूटर का झांसा देकर हजारों रुपये वसूलने का आरोप ..

दो-दो कमरों के मकानों से विश्वविद्यालयों के नाम पर संचालित हो रहे कथित सेंटर, उच्च शिक्षा विभाग और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से जांच की मांग ..
सक्ती, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना वैधानिक मान्यता एवं आवश्यक स्वीकृतियों के कुछ निजी संस्थान नामी विश्वविद्यालयों के नाम और बोर्ड लगाकर दो-दो कमरों के मकानों से कथित अध्ययन केंद्र संचालित कर रहे हैं। इन केंद्रों में प्रवेश के नाम पर छात्रों से हजारों रुपये वसूले जाने तथा छात्रवृत्ति और कंप्यूटर देने का प्रलोभन देकर उन्हें गुमराह किए जाने की शिकायत की गई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के समाजसेवियों ने उच्च शिक्षा विभाग एवं छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
♦️ रेगुलर कोर्स में प्रवेश दिलाने का आरोप –
शिकायत के अनुसार, संबंधित केंद्रों में अंजनेय विश्वविद्यालय, मैट्स विश्वविद्यालय, सी.वी. रमन विश्वविद्यालय और कलिंगा विश्वविद्यालय के नाम से बोर्ड एवं प्रचार सामग्री लगाकर बीएससी, एमएससी, बीसीए, बीकॉम, पीजीडीआरडी, पीजीडीसीए और डीसीए सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में नियमित (रेगुलर) प्रवेश दिलाने का दावा किया जा रहा था। आरोप है कि छात्रों को शासन की छात्रवृत्ति दिलाने और निःशुल्क कंप्यूटर उपलब्ध कराने का भरोसा देकर प्रवेश कराया गया।
♦️ पीड़ित छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप –
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनसे प्रवेश के नाम पर लगभग 25 हजार रुपये तक लिए गए। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि छात्रवृत्ति की राशि से फीस समायोजित कर दी जाएगी तथा निःशुल्क कंप्यूटर भी उपलब्ध कराया जाएगा। छात्रों का कहना है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो छात्रवृत्ति मिली, न कंप्यूटर दिया गया और न ही नियमित रूप से पढ़ाई संचालित हुई। उनका आरोप है कि अब अंकसूची या जमा राशि वापस मांगने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।
♦️ जांच और कार्रवाई की मांग –
समाजसेवियों ने उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे केंद्रों पर कार्रवाई नहीं की गई तो अनेक छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
♦️ उठ रहे कई सवाल –
इस पूरे मामले के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर नामी विश्वविद्यालयों के नाम का उपयोग कर कथित रूप से ऐसे केंद्र कैसे संचालित हो रहे थे? क्या संबंधित विभागों द्वारा इनकी नियमित जांच की गई थी? यदि ये केंद्र अनाधिकृत हैं तो अब तक इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
समाजसेवियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही जांच कर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं की गई और ऐसे केंद्रों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो युवाओं के हित में आंदोलन किया जाएगा। शिकायत सामने आने के बाद जिले में संचालित ऐसे कथित शिक्षा एवं कंप्यूटर केंद्रों में हलचल का माहौल बताया जा रहा है।
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