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सक्ती में सट्टा पर कार्रवाई, एक गिरफ्तारी… पर बड़े नेटवर्क पर खामोशी—जांच पर उठे सवाल ..

सट्टा कारोबार पर पुलिस का शिकंजा या सिर्फ औपचारिकता? मोबाइल डेटा से खुल सकते हैं बड़े नाम, बड़े नामों तक पहुंचेगी क्या पुलिस? ..
सक्ती, जिले में अवैध सट्टा और जुआ पर अंकुश लगाने के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। वार्ड नंबर 11 सोंठी में पुलिस द्वारा की गई हालिया कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी जरूर हुई है, लेकिन इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या यह कार्रवाई केवल “औपचारिकता” भर है या वाकई पुलिस अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का इरादा रखती है।
क्षेत्र को लंबे समय से सट्टा-जुआ के गढ़ के रूप में देखा जाता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से यहां खुलेआम सट्टा पट्टी का कारोबार चलता रहा, लेकिन पुलिस की नजरें अक्सर “अनदेखी” करती रहीं। ऐसे में अब जब वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई हुई है, तो इसे लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पहले क्यों चुप्पी थी।
मामला 24 अप्रैल 2026 का है, जब साइबर सेल की टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि सोंठी निवासी सुन्दर दास महंत अपने घर के सामने मोबाइल और कागज के जरिए सट्टा संचालित कर रहा है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी डॉ. भुनेश्वरी पैकरा के मार्गदर्शन में टीम ने दबिश दी।
दबिश के दौरान पुलिस को देखकर अन्य लोग मौके से फरार हो गए, जबकि सुन्दर दास महंत को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक मोबाइल (लगभग 7000 रुपये), सट्टा पट्टी लिखा कागज, डॉट पेन और 510 रुपये नगद जब्त किए गए। कुल जब्ती 7510 रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 6 और 7 के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
कार्रवाई में निरीक्षक लखन लाल पटेल के नेतृत्व में साइबर सेल टीम और थाना स्टाफ की सक्रिय भूमिका रही।
छोटे पर कार्रवाई, बड़े पर खामोशी? –
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सट्टा जैसे संगठित अवैध कारोबार को केवल एक व्यक्ति के स्तर पर चलाया जा सकता है? जब्त मोबाइल और सट्टा पट्टी में दर्ज लेन-देन यह संकेत देते हैं कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में सट्टा कारोबार बिना किसी संरक्षण के इतने लंबे समय तक चल ही नहीं सकता। ऐसे में यह कार्रवाई कहीं “छोटे मछली पकड़ो, बड़े को छोड़ो” वाली रणनीति तो नहीं?
जांच की दिशा पर टिकी नजरें –
अब असली परीक्षा पुलिस की आगे की कार्रवाई में है। यदि जब्त मोबाइल की कॉल डिटेल, लेन-देन और सट्टा रिकॉर्ड की गहन जांच होती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। लेकिन यदि जांच यहीं थम गई, तो यह कार्रवाई भी महज कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगी।
फिलहाल जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इस बार सट्टा नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचेगी या फिर एक बार फिर कार्रवाई सिर्फ “रिकॉर्ड सुधारने” तक सीमित रह जाएगी।
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